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लखनऊ: डीसीपी पश्चिम का सख्त निर्देश, लंबित मामलों का हो जल्द निस्तारण

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शानदार उपलब्धि! अतरौली के भाई-बहन ने किया कमाल, अब सीधे विधानसभा सदन में उठाएंगे जनता की आवाज।।

​अतरौली के भाई-बहन की जोड़ी का कमाल: विधानसभा की दहलीज तक पहुँचेंगे प्रियांशू और प्राची भारद्वाज ​ लखनऊ/अलीगढ़। प्रतिभा किसी...

शानदार उपलब्धि! अतरौली के भाई-बहन ने किया कमाल, अब सीधे विधानसभा सदन में उठाएंगे जनता की आवाज।।


​अतरौली के भाई-बहन की जोड़ी का कमाल: विधानसभा की दहलीज तक पहुँचेंगे प्रियांशू और प्राची भारद्वाज

लखनऊ/अलीगढ़। प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती, और जब इरादे फौलादी हों तो ग्रामीण अंचलों की पगडंडियाँ सीधे सत्ता के गलियारों तक का रास्ता तय करती हैं। अलीगढ़ के अतरौली की माटी का गौरव बढ़ाते हुए प्रियांशू भारद्वाज और उनकी बहन प्राची भारद्वाज ने एक नया इतिहास रच दिया है।

​भारत सरकार के 'मेरा युवा भारत' (MY Bharat) अभियान के तहत इन दोनों भाई-बहनों का चयन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित होने वाली 'राज्य स्तरीय विकसित भारत युवा संसद' के लिए हुआ है।

​विधानसभा में गूंजेगी अलीगढ़ की आवाज

​भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत अलीगढ़ जनपद से मात्र 5 मेधावियों का चयन किया गया है, जिनमें प्रियांशू और प्राची ने अपनी जगह पक्की की है। 01 मई से 03 मई 2026 तक चलने वाले इस गौरवशाली कार्यक्रम में ये दोनों युवा विधानसभा सदन के भीतर 'विकसित भारत' के विजन पर अपना कौशल और विचार प्रस्तुत करेंगे।

​जिला प्रशासन ने दी आधिकारिक मंजूरी

​जिला युवा अधिकारी सोनाली नेगी ने आधिकारिक रूप से इनके नामों की पुष्टि कर दी है। प्रियांशू भारद्वाज, जो पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर 'यूथ आइकॉन' के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं, अब अपनी बहन प्राची के साथ मिलकर सदन में अतरौली और अलीगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे।

​ग्रामीण प्रतिभा का वैश्विक उदय

​एक ही परिवार के दो सगे भाई-बहनों का राज्य स्तर की इस प्रतिष्ठित युवा संसद के लिए चुना जाना पूरे जनपद के लिए गर्व का विषय है। 30 अप्रैल को यह दल लखनऊ के लिए रवाना हो चुका है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर विधानसभा के सदन तक पहुँचने का यह सफर उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • चयनित प्रतिभागी: प्रियांशू भारद्वाज एवं प्राची भारद्वाज।
  • स्थान: राज्य विधानसभा, लखनऊ।
  • अवधि: 01 से 03 मई 2026।
  • आयोजक: मेरा युवा भारत (भारत सरकार)।

रिपोर्ट: दीपक भारद्वाज, अलीगढ़

अलीगढ़ स्वास्थ्य विभाग में बड़ा खेल: 118 नियुक्तियों की फाइलें 'लापता', भ्रष्टाचार या सोची-समझी साजिश?

अलीगढ़ स्वास्थ्य विभाग: 118 नियुक्तियां और 'लापता' फाइलें— भ्रष्टाचार का बड़ा खेल या महज लापरवाही?
अलीगढ़ (दीपक भारद्वाज): सरकारी विभागों में 'फाइलें गुम होना' अक्सर किसी बड़े सच को दफन करने का पुराना तरीका माना जाता है। लेकिन जब मामला 118 परिवारों के भविष्य और सरकारी खजाने से जुड़ी नियुक्तियों का हो, तो यह 'गुमशुदगी' सीधे तौर पर सिस्टम की नीयत पर सवाल खड़ा करती है। अलीगढ़ स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2012 में हुई संविदा भर्तियों का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
क्या है पूरा प्रकरण?
मामला वर्ष 2012 का है, जब अलीगढ़ स्वास्थ्य विभाग में 30 डॉक्टरों सहित कुल 118 पदों पर संविदा कर्मियों की भर्ती की गई थी। सरकारी नियमावली के अनुसार, ऐसी नियुक्तियों के लिए विज्ञापन जारी करना, इंटरव्यू बोर्ड का गठन और चयन मेरिट की फाइलों का सुरक्षित होना अनिवार्य है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जब इन भर्तियों की पारदर्शिता पर आरटीआई (RTI) के जरिए जवाब मांगा गया, तो विभाग ने हाथ खड़े करते हुए कह दिया— "रिकॉर्ड गायब है!"
अजीबोगरीब दलील: शिफ्टिंग में खो गए दस्तावेज
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय की ओर से तर्क दिया गया है कि वर्ष 2015 में जब कार्यालय की शिफ्टिंग हुई थी, उसी दौरान ये महत्वपूर्ण दस्तावेज संभवतः नष्ट हो गए या खो गए। सवाल यह उठता है कि क्या 118 लोगों की नियुक्ति प्रक्रिया इतनी मामूली थी कि उसे रद्दी समझकर छोड़ दिया गया? आखिर इन दस्तावेजों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और बाबुओं पर अब तक जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई?
सूचना आयोग की सख्ती के बाद भी विभाग 'मौन'
यह मामला राज्य सूचना आयोग की चौखट तक भी पहुँचा। आयोग ने इस लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए धारा 20 के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी। लेकिन हकीकत यह है कि एक साल से अधिक का समय बीत जाने और दर्जनों पेशियों के बावजूद, न तो वह 'खोया' हुआ रिकॉर्ड मिला और न ही किसी दोषी पर गाज गिरी।
सिस्टम से 'अटल सत्य' टीवी न्यूज़ 24 के कुछ चुभते सवाल:
विज्ञापन का रहस्य: यदि नियुक्तियां निष्पक्ष थीं, तो वह विज्ञापन कहाँ है जो अखबारों में जारी किया गया था?
चयन प्रक्रिया: इंटरव्यू बोर्ड में कौन-कौन शामिल था और किस मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन हुआ?
दबाव की राजनीति: पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। आखिर विभाग किसे बचाने की कोशिश कर रहा है?
निष्कर्ष
फाइलों का 'लापता' होना अक्सर इस बात का संकेत होता है कि पर्दे के पीछे बहुत कुछ ऐसा है जिसे सामने आने से रोका जा रहा है। अलीगढ़ स्वास्थ्य विभाग की यह खामोशी चीख-चीखकर कह रही है कि शायद नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को रेवड़ियां बांटी गई थीं।
अब देखना यह होगा कि क्या उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य मंत्रालय और शासन इस मामले का संज्ञान लेकर उन 118 नियुक्तियों की उच्चस्तरीय जांच कराएगा, जिनकी फाइलें वर्तमान में 'साजिश के मलबे' में दबी नजर आ रही हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट: दीपक भारद्वाज अलीगढ़।


क्राइम खबर अलीगढ़ लापता युवक का शव मिला झाड़ियों में।

अतरौली: तीन दिन से लापता युवक का शव काली नदी में मिला, परिजनों में मची चीख-पुकार

अतरौली (अलीगढ़): तहसील क्षेत्र के ग्राम आलमपुर में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब पिछले तीन दिनों से लापता एक युवक का शव शुक्रवार सुबह काली नदी में उतराता हुआ मिला। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

क्या है पूरा मामला?

​जानकारी के मुताबिक, ग्राम आलमपुर निवासी नितिन कुमार (32 वर्ष), पुत्र जंगली सिंह, बीते 29 अप्रैल को संदिग्ध परिस्थितियों में घर से लापता हो गया था। परिजनों ने अपने स्तर पर हर संभावित जगह नितिन की तलाश की, लेकिन उसका कहीं कोई पता नहीं चल सका। शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे जब ग्रामीण खेतों की ओर जा रहे थे, तब उन्होंने नदी के किनारे शव को देखा।

मौके पर जुटी भारी भीड़

​शव मिलने की सूचना जैसे ही गांव में फैली, काली नदी के किनारे लोगों का भारी मजमा लग गया। ग्रामीणों की शिनाख्त के बाद शव की पहचान नितिन के रूप में हुई। मौके पर मौजूद ग्राम प्रधान वीरपाल सिंह ने तत्काल स्थानीय पुलिस को घटना की जानकारी दी।

पुलिस की कार्रवाई

​सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों के सहयोग से शव को नदी से बाहर निकाला। पुलिस ने वैधानिक कार्रवाई करते हुए शव का पंचनामा भरा और उसे पोस्टमार्टम के लिए अलीगढ़ जिला मुख्यालय भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी।

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने जताया शोक

​घटना की जानकारी मिलते ही वार्ड संख्या 5 के पूर्व जिला पंचायत सदस्य रूप सिंह पहलवान मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया और दुःख की इस घड़ी में हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

रिपोर्ट: दीपक भारद्वाज

संपादन: न्यूज़ डेस्क, अटल सत्य टीवी न्यूज़ 24

स्थान: अलीगढ़

पक्षी मित्र अभियान के साथ साधना सिंह को श्रद्धांजलि: निपानिया में सेवा और संवेदना का अनूठा संगम।

: निपानिया की आशीर्वाद विला सोसायटी में “पक्षी मित्र अभियान” के साथ पुण्य स्मरण
इंदौर आटल सत्य टी वी न्यूज 24 के लिए अजय बियानी की रिपोर्ट।
इंदौर, निपानिया। दिनांक १ मई को स्वर्गीय साधना सिंह की पांचवीं पुण्यतिथि के अवसर पर निपानिया स्थित आशीर्वाद विला सोसायटी में एक प्रेरणादायक सामाजिक पहल का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सोसायटी के सदस्यों ने घनश्याम सिंह के साथ मिलकर “पक्षी मित्र अभियान” के अंतर्गत पक्षियों के लिए दाना-पानी हेतु सकोरों का वितरण किया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी नागरिकों ने संकल्प लिया कि वे प्रतिदिन पक्षियों के लिए दाना और पानी की व्यवस्था करेंगे, ताकि बढ़ती गर्मी में पक्षियों को राहत मिल सके। इस पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और जीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी दिया गया।
इस अवसर पर योग प्रशिक्षक निधि बांगर, वीरेन्द्र चौधरी, रंजना बघेल, ज्योति रमानी, अनिता मुंद्रे, आशीष, रामकृष्ण यादव, उपाध्याय जी, श्रीवास्तव जी, राखी एवं अनन्या सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
साथ ही, रोटरी क्लब ऑफ इंदौर मेघदूत एवं लायंस क्लब ऑफ इंदौर सनशाइन के सदस्यों ने स्वर्गीय साधना सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सेवा कार्यों को स्मरण किया।
कार्यक्रम में विनय गुप्ता, घनश्याम सिंह तथा पत्रकार एवं पूर्व पार्षद गणेश चौधरी की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने ऐसे जनहितकारी अभियानों को निरंतर जारी रखने पर जोर दिया।

निपानिया में धुएं का कहर: खुले में कचरा जलाने से बढ़ता प्रदूषण, लोगों ने की कार्रवाई की मांग।

स्लग: निपानिया में कचरा जलाने से बढ़ता प्रदूषण
स्थान: इंदौर
रिपोर्ट: अजय बियानी | अटल सत्य TV न्यूज 24
इंदौर के निपानिया क्षेत्र में खुले में कचरा जलाने की समस्या ने स्थानीय रहवासियों की चिंता बढ़ा दी है। डी-मार्ट के सामने स्थित फूड ज़ोन इलाके में लगातार कचरा जलाए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे क्षेत्र में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कचरे के उचित निस्तारण की प्रक्रिया अपनाने के बजाय नियमों को दरकिनार कर उसे खुले में जलाया जा रहा है। इससे उठने वाला घना धुआं आसपास के वातावरण को दूषित कर रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है।
खासतौर पर सुबह और शाम के समय मॉर्निंग वॉक और ईवनिंग वॉक के लिए निकलने वाले लोगों को धुएं के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रहवासियों का कहना है कि इससे सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।
क्षेत्र के नागरिकों ने नगर निगम से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और कचरा प्रबंधन के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने की अपील की है, ताकि निपानिया क्षेत्र में स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण कायम रह सके।

मुजरिम को पकड़ने की धुन में कुर्बान किए पैर, UP पुलिस ने निभाया फर्ज; सिपाही आकाश को मिली ₹1.50 करोड़ की सहायता।


खाकी का जज्बा: आरोपी को पकड़ने में गंवाए दोनों पैर, DGP ने सिपाही आकाश सिंह को सौंपी 1.5 करोड़ की सहायता राशि

गोण्डा/लखनऊ | ब्यूरो रिपोर्ट शिव शरण

​उत्तर प्रदेश पुलिस के एक जांबाज सिपाही की बहादुरी और उसके बाद आई दुखों की आंधी में विभाग ने संबल प्रदान किया है। गोण्डा जीआरपी में तैनात सिपाही आकाश सिंह, जिन्होंने ड्यूटी के दौरान अपनी जान की परवाह न करते हुए एक आरोपी को पकड़ने के प्रयास में अपने दोनों पैर गंवा दिए, उन्हें आज डीजीपी मुख्यालय में बड़ी आर्थिक मदद प्रदान की गई।

डीजीपी राजीव कृष्ण ने खुद सौंपा चेक

​उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्ण ने आज घायल सिपाही आकाश सिंह की पत्नी को डीजीपी मुख्यालय बुलाकर 1 करोड़ 50 लाख रुपये (डेढ़ करोड़) की आर्थिक सहायता का चेक सौंपा। यह राशि बैंक ऑफ बड़ौदा के माध्यम से प्रदान की गई है। इस दौरान डीजीपी ने परिवार को ढांढस बंधाया और सिपाही के साहस की सराहना की।

कैसे हुआ था यह दर्दनाक हादसा?

​घटना 31 मार्च की देर रात की है। सिपाही आकाश सिंह जीआरपी कस्टडी से भाग रहे एक आरोपी का पीछा कर रहे थे। फर्ज के प्रति जुनून ऐसा था कि वह दौड़ते हुए ट्रेन की चपेट में आ गए।

  • पहला पैर: मौके पर ही एक पैर पूरी तरह कट गया था।
  • दूसरा पैर: उन्हें तत्काल लखनऊ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान डॉक्टरों को उनका दूसरा पैर भी काटना पड़ा।
  • वर्तमान स्थिति: सिपाही आकाश सिंह अब पूरी तरह चलने में असमर्थ हैं और अस्पताल में जीवन की जंग लड़ रहे हैं।

अब तक मिली कुल सहायता

​पुलिस विभाग और प्रशासन आकाश सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। डेढ़ करोड़ की इस बड़ी राशि से पहले भी उन्हें कई स्तरों पर मदद मिली है:

  1. 1 अप्रैल: डीजीपी ने 1 लाख रुपये की प्रारंभिक मदद दी।
  2. 10 अप्रैल: जीआरपी अनुभाग गोरखपुर द्वारा 10.88 लाख रुपये की सहायता।
  3. जीआरपी लखनऊ: अनुभाग द्वारा 5.14 लाख रुपये की मदद दी गई।

विभागीय जांच पर टिकी नजरें

​इस पूरी घटना को लेकर एक विभागीय जांच भी चल रही है। जांच शुरू हुए एक माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक अंतिम रिपोर्ट आनी बाकी है। जीआरपी पुलिस अधीक्षक (गोरखपुर) लक्ष्मी निवास मिश्रा ने बताया कि:

​"सिपाही आकाश सिंह का इलाज लखनऊ में चल रहा है। विभाग पीड़ित परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। जांच प्रक्रिया जल्द पूरी कर उचित अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।"


अटल सत्य टीवी न्यूज़ 24 की अपील

​सिपाही आकाश सिंह जैसे जांबाज हमारे समाज के असली हीरो हैं, जो अपराधियों को पकड़ने के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा देते हैं। विभाग की इस त्वरित आर्थिक मदद की हर तरफ सराहना हो रही है।

Headlines (विकल्प):

  1. कर्तव्य की वेदी पर न्योछावर किए पैर: जांबाज सिपाही आकाश सिंह को यूपी पुलिस ने दी ₹1.5 करोड़ की मदद।
  2. गोण्डा जीआरपी के बहादुर सिपाही आकाश सिंह के परिवार को DGP ने दिया सहारा, 1.5 करोड़ का चेक भें GRP Constable Akash Singh, DGP Rajeev Krishna, Gonda News, UP Police Economic Help, Atal Satya TV News 24, GRP Lucknow, Police Bravery.

यूपी पंचायत चुनाव: "अधिकारियों को अधिकार देना चाहती है सरकार", स्वामी प्रसाद मौर्य ने कार्यकाल बढ़ाने की मांग की।​मनरेगा का नाम बदलने पर भड़के मौर्य, बोले- "2027 के चुनाव में फंड का दुरुपयोग करना चाहती है बीजेपी"।

योगी सरकार पर बरसे स्वामी प्रसाद मौर्य, कहा-

'लोकतंत्र का गला घोंट रही सरकार', प्रदेशव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी

लखनऊ | अटल बिहारी शर्मा की रिपोर्ट

​उत्तर प्रदेश की सियासत में पंचायत चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और दिग्गज नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने लखनऊ में प्रेस वार्ता के दौरान योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर पंचायत चुनाव टालने की साजिश रचने और लोकतंत्र विरोधी कार्य करने का गंभीर आरोप लगाया है।

"हार के डर से चुनाव नहीं करा रही सरकार"

​स्वामी प्रसाद मौर्य ने सीधे तौर पर कहा कि योगी सरकार पंचायत प्रतिनिधियों (प्रधान, बीडीसी, ब्लॉक प्रमुख) से डरी हुई है। उन्होंने कहा:

​"2017 की तरह सरकार को डर है कि चुनकर आने वाले प्रतिनिधि उनके बस में रहेंगे या नहीं। पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने वाला है, लेकिन अब तक अधिसूचना जारी न करना सरकार की बदनीति को दर्शाता है।"


पंचायत प्रतिनिधियों के हक में उठाई आवाज

​मौर्य ने मांग की कि पंचायत चुनाव में लगभग 10 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि चुनकर आते हैं। अगर सरकार समय पर चुनाव नहीं कराती है, तो वर्तमान प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल यथावत बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव न कराकर पंचायतों का अधिकार अधिकारियों की झोली में डालना चाहती है, जिससे विकास कार्य बाधित होंगे।

मनरेगा के नाम बदलने और फंड के दुरुपयोग पर बड़ा दावा

​स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक और चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि मनरेगा (MNREGA) योजना का नाम बदलकर 'जी रामजी योजना' कर दिया गया है।

  • फंड की कमी: उन्होंने आरोप लगाया कि नाम बदलने के बाद से पंचायतों को एक भी रुपया नहीं मिला है।
  • चुनावी दुरुपयोग: मौर्य ने आशंका जताई कि सरकार इस योजना के हजारों करोड़ रुपये के फंड को 2027 के विधानसभा चुनाव में दुरुपयोग करने के लिए बचाकर रख रही है।

फतेहपुर जाने से रोकने पर पुलिस और सरकार को घेरा

​फतेहपुर में हुए अपराध के पीड़ितों से मिलने जा रहे स्वामी प्रसाद मौर्य को पुलिस द्वारा नोटिस दिए जाने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा:

  1. अपराधियों का बोलबाला: यूपी पुलिस अपराधियों को पकड़ने में नाकाम है, लेकिन पीड़ितों का दर्द बांटने वालों को रोक रही है।
  2. अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच: मौर्य ने मांग की कि पकड़े गए आरोपियों की कॉल रिकॉर्डिंग निकाली जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ये अपराधी लड़कियों को विदेशों में भेजने वाले गिरह से जुड़े हो सकते हैं।
  3. आंदोलन की चेतावनी: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "अगर मुझे फतेहपुर जाने से रोका गया, तो पूरे प्रदेश में व्यापक जन-आंदोलन होगा।"

निष्कर्ष

​स्वामी प्रसाद मौर्य के इन तेवरों ने प्रदेश की राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है। अब देखना यह है कि योगी सरकार पंचायत चुनावों और इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाती है।

 स्वामी प्रसाद मौर्य, योगी सरकार, यूपी पंचायत चुनाव 2026, मनरेगा फंड, फतेहपुर पुलिस नोटिस, अटल सत्य टीवी न्यूज़ 24, उत्तर प्रदेश राजनीति।